मंदसौर जिले के छोटे से गांव राकोदा में स्थित मटर मंडी, जो पूरे क्षेत्र के किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र है, आज एक बार फिर नरम रही। दिसंबर के इस ठंडे मौसम में जब हरी मटर की फसल अपने चरम पर होती है, तब बाजार की यह स्थिति किसानों के लिए चिंता का विषय बन गई है। आज की रिपोर्ट के अनुसार, विभिन्न गुणवत्ता वाली मटर की कीमतें पिछले दिनों की तुलना में थोड़ी कम रही हैं, जिससे व्यापारियों और किसानों दोनों में एक तरह की सुस्ती देखी गई। राकोदा मंडी, जो मुख्य रूप से हरी मटर के व्यापार के लिए जानी जाती है, यहां से माल राजस्थान, गुजरात, दिल्ली और यहां तक कि चंडीगढ़ जैसे दूर-दराज के बाजारों तक पहुंचता है। लेकिन आज का नरम बाजार इस बात का संकेत है कि आपूर्ति की अधिकता और मांग में कमी के कारण कीमतें दबाव में हैं।
बेस्ट क्वालिटी पेंसिल 36 से39
Medium 33 से 35
Halka 32 से 34
देसी बेस्ट मॉल 27 से 28 29
मीडियम 25 से 26
हल्का 24 से 23
बाजार आज नरम रहा राकोदा मटर मंडी
आइए पहले आज की कीमतों पर एक नजर डालते हैं। मंडी में बेस्ट क्वालिटी की पेंसिल वैरायटी की मटर 36 से 39 रुपये प्रति किलो तक बिकी। यह वह वैरायटी है जो लंबी, पतली और चमकदार होती है, जिसे बाजार में ‘पेंसिल’ नाम से जाना जाता है क्योंकि इसकी शक्ल पेंसिल जैसी पतली और सीधी होती है। यह उच्च गुणवत्ता वाली मटर होती है, जो आमतौर पर शहरों के बड़े बाजारों और निर्यात के लिए पसंद की जाती है। लेकिन आज की कीमतें पिछले हफ्ते की 40-42 रुपये की रेंज से थोड़ी नीचे हैं, जो बाजार की नरमी को दर्शाती हैं।
इसके बाद मीडियम क्वालिटी की मटर 33 से 35 रुपये प्रति किलो रही। यह वैरायटी थोड़ी मोटी और सामान्य गुणवत्ता वाली होती है, जो स्थानीय बाजारों और घरेलू उपयोग के लिए उपयुक्त होती है। हल्की क्वालिटी की मटर, जो आकार में छोटी और कम चमकदार होती है, 32 से 34 रुपये प्रति किलो तक बिकी। देसी वैरायटी, जो स्थानीय किसानों द्वारा उगाई जाने वाली पारंपरिक मटर है, आज 27 से 29 रुपये प्रति किलो तक रही। यह वैरायटी स्वाद में बेहतरीन होती है लेकिन आकार और दिखावट में थोड़ी कमजोर, इसलिए इसकी कीमत हमेशा थोड़ी कम रहती है। फिर मीडियम ग्रेड की एक और श्रेणी 25 से 26 रुपये और सबसे हल्की क्वालिटी 23 से 24 रुपये प्रति किलो तक देखी गई। कुल मिलाकर, सभी श्रेणियों में कीमतें स्थिर लेकिन नरम रहीं, मतलब कोई बड़ा उछाल नहीं आया।
राकोदा मंडी की बात करें तो यह मंदसौर जिले की एक प्रमुख कृषि मंडी है, जहां हर साल दिसंबर से फरवरी तक मटर की बड़ी आवक होती है। इस साल की शुरुआत में मंडी ने अच्छी शुरुआत की थी, जब नवंबर के अंत में कीमतें 45 रुपये तक पहुंच गई थीं। लेकिन जैसे-जैसे फसल की कटाई बढ़ी और आवक बढ़ी, बाजार में दबाव बन गया। आज की रिपोर्ट से पता चलता है कि मंडी में लगभग 1000-1200 क्विंटल मटर की आवक हुई, जो पिछले दिन से थोड़ी कम है, लेकिन फिर भी पर्याप्त है। व्यापारियों का कहना है कि ठंड के मौसम में मटर की मांग तो है, लेकिन कोरोना के बाद की आर्थिक स्थिति और महंगाई के कारण उपभोक्ता कम खरीद रहे हैं। इसके अलावा, अन्य राज्यों से सस्ती मटर की आपूर्ति भी यहां के बाजार को प्रभावित कर रही है।
किसानों की स्थिति पर नजर डालें तो यह नरम बाजार उनके लिए चुनौतीपूर्ण है। राकोदा और आसपास के गांवों के अधिकांश किसान मटर की खेती पर निर्भर हैं। एक किसान, जिनका नाम रामलाल है, ने बताया, “इस साल बारिश अच्छी हुई थी, फसल भी बढ़िया है, लेकिन बाजार में दाम नहीं मिल रहे। लागत निकालना मुश्किल हो रहा है।” मटर की खेती में बीज, खाद, पानी और मजदूरी की लागत करीब 20-25 हजार रुपये प्रति एकड़ आती है, और अगर कीमतें 30 रुपये से नीचे रहती हैं तो मुनाफा कम हो जाता है। कई किसान अब वैकल्पिक फसलों की ओर रुख कर रहे हैं, लेकिन मटर यहां की मुख्य फसल है क्योंकि यह ठंडी जलवायु में अच्छी उगती है। सरकार की ओर से न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की मांग भी जोर पकड़ रही है, लेकिन फिलहाल मटर जैसी सब्जियों के लिए कोई सख्त नीति नहीं है।
बाजार की नरमी के पीछे कई कारण हैं। सबसे पहले, इस साल मध्य प्रदेश, राजस्थान और गुजरात में मटर की बंपर फसल हुई है। मौसम अनुकूल रहा, जिससे उत्पादन बढ़ा। दूसरा, परिवहन की लागत बढ़ने से दूर के बाजारों तक माल पहुंचाना महंगा हो गया है। ट्रक किराया और ईंधन की कीमतें ऊंची हैं, जो व्यापारियों को कीमतें बढ़ाने से रोक रही हैं। तीसरा, शहरों में खुदरा बाजार में मटर 50-60 रुपये प्रति किलो बिक रही है, लेकिन थोक में कमी के कारण फर्क बढ़ गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर मांग बढ़े, जैसे कि त्योहारों के मौसम में, तो कीमतें सुधार सकती हैं। लेकिन फिलहाल, निर्यात के अवसर भी कम हैं क्योंकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धा ज्यादा है।
राकोदा मंडी का इतिहास भी दिलचस्प है। यह मंडी कुछ साल पहले किसानों द्वारा खुद शुरू की गई थी, ताकि वे अपनी फसल को सीधे बेच सकें बिना बिचौलियों के। आज यहां रोजाना 50-60 लाख रुपये का कारोबार होता है, जो स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करता है। मंडी में सुविधाएं जैसे वजन कांटा, छायादार जगह और पानी की व्यवस्था है, लेकिन अभी भी सुधार की जरूरत है। किसान संघों ने मांग की है कि सरकार यहां एक कोल्ड स्टोरेज बनाए, ताकि मटर को ज्यादा दिनों तक रखा जा सके और कीमतों में स्थिरता आए।
कुल मिलाकर, आज का नरम बाजार एक चेतावनी है कि कृषि बाजार कितने अनिश्चित हो सकते हैं। किसानों को बेहतर बीज, सिंचाई और बाजार जानकारी की जरूरत है। अगर आप राकोदा क्षेत्र के निवासी हैं या मटर का व्यापार करते हैं, तो सलाह है कि बाजार की दैनिक रिपोर्ट पर नजर रखें। आने वाले दिनों में अगर आवक कम हुई तो कीमतें बढ़ सकती हैं। लेकिन फिलहाल, धैर्य रखना जरूरी है। मटर की खेती न केवल पोषण से भरपूर है बल्कि पर्यावरण के लिए भी फायदेमंद, क्योंकि यह मिट्टी में नाइट्रोजन बढ़ाती है। उम्मीद है कि जल्द ही बाजार में तेजी आएगी और किसानों के चेहरे पर मुस्कान लौटेगी।