मध्य प्रदेश के उज्जैन जिले में स्थित कचरोड़ कृषि उपज मंडी, हरी मटर के लिए क्षेत्र की प्रमुख मंडियों में से एक है। सर्दियों के मौसम में यहां मटर की आवक जोरों पर होती है और दूर-दूर से किसान अपनी फसल लेकर आते हैं। आज, 15 दिसंबर 2025 को कचरोड़ मटर मंडी में बाजार पूरी तरह स्थिर रहा। न तो कोई बड़ी तेजी देखी गई और न ही मंदी। व्यापारियों और किसानों का कहना है कि सप्लाई और डिमांड दोनों संतुलित हैं, इसलिए भावों में कोई बड़ा उतार-चढ़ाव नहीं हुआ।
मंडी में मटर की विभिन्न क्वालिटी के अनुसार भाव इस प्रकार रहे:
बेस्ट क्वालिटी पेंसिल: 37 से 38 रुपये प्रति किलोग्राम। यह सबसे ऊंची क्वालिटी की मटर होती है, जिसमें दाने लंबे, चमकदार और एकसार होते हैं। शहरों के बड़े व्यापारी और एक्सपोर्टर इसी क्वालिटी को पसंद करते हैं।
मीडियम: 35 से 36 रुपये प्रति किलोग्राम। यह औसत क्वालिटी वाली मटर है, जो स्थानीय बाजारों और छोटे व्यापारियों के लिए उपयुक्त रहती है।
हल्का: 30 से 34 रुपये प्रति किलोग्राम। इसमें दाने थोड़े छोटे या कम चमकदार होते हैं, लेकिन फिर भी बाजार में अच्छी मांग रहती है।
देसी मटर के भाव –
देसी: बेस्ट क्वालिटी 34 से 36 रुपये प्रति किलोग्राम। लोकल किसानों द्वारा उगाई गई देसी किस्म की मटर, जो स्वाद में मीठी होती है और घरेलू उपयोग के लिए पसंद की जाती है।
मीडियम: 30 से 34 रुपये प्रति किलोग्राम (दूसरी कैटेगरी में भी यही रेंज देखी गई)।
हल्का: 29 से 31 रुपये प्रति किलोग्राम। सबसे निचली क्वालिटी, जिसमें दाने छोटे या हल्के खराब हो सकते हैं, लेकिन गरीब तबके के लिए सस्ती विकल्प के रूप में बिकती है।
मंडी सूत्रों के अनुसार, आज की आवक सामान्य रही। पिछले कुछ दिनों से मौसम ठंडा और सूखा होने के कारण मटर की फसल अच्छी गुणवत्ता वाली आई है, जिससे बेस्ट क्वालिटी के भाव ऊपर बने हुए हैं। हालांकि, हल्की क्वालिटी में थोड़ी नरमी दिखी, क्योंकि कुछ किसानों की फसल में हल्की नमी या कीट प्रभाव देखा गया। व्यापारियों का मानना है कि अगर आने वाले दिनों में ठंड और बढ़ी तो मटर की मांग बढ़ सकती है, खासकर त्योहारों और नए साल के मौके पर।
कचरोड़ मंडी न केवल स्थानीय किसानों के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि इंदौर, उज्जैन और भोपाल जैसे बड़े शहरों में सप्लाई का बड़ा स्रोत भी है। यहां मटर की बोली सुबह से शुरू होकर दोपहर तक चलती है। किसान ट्रैक्टर-ट्रॉलियों या छोटे वाहनों से फसल लेकर आते हैं और आढ़तिया उनकी मदद से बोली करवाते हैं। आज कई किसानों ने बताया कि भाव स्थिर होने से उन्हें राहत मिली है, क्योंकि पिछले सप्ताह हल्की बारिश के कारण कुछ चिंता थी कि भाव गिर सकते हैं।
मटर की खेती मालवा क्षेत्र में काफी लोकप्रिय है। किसान अगेती और मध्य किस्में उगाते हैं, ताकि दिसंबर-जनवरी में अच्छी पैदावार मिले। इस साल सिंचाई सुविधाओं और अच्छे बीजों के कारण उत्पादन बेहतर रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि मटर एक नकदी फसल है, जो किसानों को कम समय में अच्छी कमाई देती है। लेकिन क्वालिटी पर बहुत निर्भर करती है – पेंसिल शेप वाली मटर हमेशा प्रीमियम पर बिकती है।
बाजार के जानकारों के अनुसार, आने वाले दिनों में अगर उत्तर भारत में ठंड बढ़ी तो मटर के भावों में हल्की तेजी आ सकती है। फिलहाल, स्थिर बाजार किसानों और व्यापारियों दोनों के लिए संतोषजनक है। अगर आप कचरोड़ या आसपास के इलाके के किसान हैं, तो अपनी फसल की क्वालिटी का ध्यान रखें – बेस्ट क्वालिटी हमेशा बेहतर दाम दिलाती है