खाचरोद, मध्य प्रदेश की प्रसिद्ध हरी मटर मंडी, जो मालवा क्षेत्र की प्रमुख कृषि उपज मंडियों में से एक है, इन दिनों भावों में आई गिरावट से सुर्खियों में है।
दिसंबर के अंतिम सप्ताह में, विशेष रूप से 25 दिसंबर 2025 को, मंडी में हरी मटर के भाव पिछले कुछ दिनों की तुलना में काफी नीचे दर्ज किए गए हैं।
पेंसिल और देसी दोनों किस्मों की मटर में यह गिरावट देखी जा रही है, जो किसानों के लिए चिंता का विषय बन गई है। जहां 20 दिसंबर को बाजार में सुधार के संकेत दिखे थे और बेस्ट क्वालिटी पेंसिल मटर 23-26 रुपये प्रति किलो तक बिकी थी, वहीं अब भावों में फिर से नरमी आ गई है।
अनुमानित रूप से आज के भाव
पेंसिल बेस्ट क्वालिटी में 17-18 रुपये,
मीडियम 15-16 रुपये
और हल्की 13-15 रुपये प्रति किलो के आसपास हैं,
देसी मटर के भाव
जबकि देसी किस्म में बेस्ट 14-15,
मीडियम 13-14
और हल्की 8-12 रुपये प्रति किलो तक देखे जा रहे हैं।
यह गिरावट किसानों की मेहनत पर पानी फेर रही है और बाजार की गतिशीलता को उजागर कर रही है। इस लेख में हम इस गिरावट के कारणों, प्रभावों, मंडी के इतिहास और भविष्य की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा करेंगे।
खाचरोद मंडी की शुरुआत 1980 के दशक में हुई थी, जब मालवा-निमाड़ क्षेत्र में हरी मटर की खेती बड़े पैमाने पर शुरू हुई। मध्य प्रदेश के उज्जैन जिले में स्थित यह मंडी, इंदौर, रतलाम और उज्जैन जैसे बड़े शहरों से जुड़ी होने के कारण पूरे देश में हरी मटर की आपूर्ति का प्रमुख केंद्र बन गई। यहां मुख्य रूप से दो किस्में आती हैं – पेंसिल मटर, जो लंबी, पतली और चमकदार होती है, और देसी मटर, जो अधिक तीखी और स्थानीय स्वाद वाली होती है। इनकी ग्रेडिंग बेस्ट, मीडियम और हल्की क्वालिटी के आधार पर की जाती है। बेस्ट क्वालिटी में दाने बड़े, हरे और बिना दाग के होते हैं, जबकि हल्की में आकार छोटा या कुछ दोष हो सकते हैं। मंडी में रोजाना सैकड़ों ट्रक मटर की आवक होती है, जो दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और अन्य बड़े शहरों तक पहुंचती है। सर्दियों में यह मंडी पूरे भारत की सब्जी बाजार को प्रभावित करती है।
हालांकि, इस साल दिसंबर में बाजार ने उतार-चढ़ाव दिखाया है।
19 दिसंबर को बंपर आवक के कारण भावों में भारी गिरावट दर्ज की गई थी, जहां पेंसिल बेस्ट 20-22 रुपये और देसी हल्की 10-12 रुपये तक गिर गई थी। किसान चिंतित थे क्योंकि लागत बढ़ने के बावजूद दाम नहीं मिल रहे थे। फिर 20 दिसंबर को आवक कम होने और मांग बढ़ने से सुधार आया – पेंसिल बेस्ट 23-26 रुपये तक पहुंच गई। लेकिन अब फिर से गिरावट का दौर शुरू हो गया है। विशेषज्ञों के अनुसार, मुख्य कारण मौसम की अनिश्चितता और त्योहारों के बाद मांग में कमी है। क्रिसमस और न्यू ईयर के आसपास सब्जियों की खपत बढ़ती है, लेकिन इस बार ठंड कम होने से फसल जल्दी तैयार हुई और एक साथ बड़ी आवक आ गई। इससे सप्लाई अधिक और डिमांड कम हो गई, जिससे भाव गिरे। इसके अलावा, अन्य राज्यों जैसे राजस्थान और उत्तर प्रदेश से भी मटर की आवक बढ़ी है, जो खाचरोद पर दबाव डाल रही है।
इस गिरावट का सबसे बड़ा असर किसानों पर पड़ रहा है।
एक किसान ने बताया कि बीज, खाद, मजदूरी और सिंचाई में हजारों रुपये खर्च करने के बाद अगर 15-18 रुपये प्रति किलो भी नहीं मिलें, तो नुकसान तय है। कई किसान मजबूरी में कम दाम पर माल बेच रहे हैं, जबकि कुछ इंतजार कर रहे हैं कि भाव सुधरें। मंडी में व्यापारी भी सतर्क हैं – वे ज्यादा स्टॉक नहीं ले रहे क्योंकि आगे मौसम खराब होने पर मटर खराब हो सकती है। प्रोसेसिंग यूनिट्स और एक्सपोर्टर्स की मांग भी कम है, जो बाजार को और कमजोर कर रही है। महिलाएं और छोटे किसान सबसे ज्यादा प्रभावित हैं, क्योंकि मटर की तुड़ाई में उनका बड़ा योगदान होता है।
सरकार और कृषि विशेषज्ञ क्या सुझाव दे रहे हैं?
कृषि विभाग किसानों को सलाह दे रहा है कि वे अच्छी ग्रेडिंग करें, साफ-सुथरी पैकिंग में माल लाएं और जल्दबाजी न करें। कोल्ड स्टोरेज का उपयोग बढ़ाने की बात हो रही है, ताकि आवक को नियंत्रित किया जा सके। एमएसपी या न्यूनतम समर्थन मूल्य की मांग भी उठ रही है, लेकिन हरी सब्जियों पर यह लागू नहीं होता। कुछ किसान संगठन ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स और डायरेक्ट मार्केटिंग की ओर जा रहे हैं, जहां बेहतर दाम मिल सकते हैं। लंबे समय में, विविधीकरण जरूरी है – मटर के साथ अन्य फसलें जैसे लहसुन, आलू या मसाले उगाएं, ताकि जोखिम कम हो।
भविष्य की बात करें तो जनवरी में ठंड बढ़ने पर मांग बढ़ सकती है, जिससे भाव सुधरने की उम्मीद है। लेकिन अगर आवक इसी तरह रही, तो गिरावट जारी रह सकती है। विशेषज्ञ अनुमान लगा रहे हैं कि नए साल के पहले सप्ताह तक बाजार स्थिर हो सकता है। किसानों को रोजाना मंडी भाव ट्रैक करने की सलाह है – ऐप्स जैसे शूरू या कमोडिटी ऑनलाइन से अपडेट लें।
खाचरोद मंडी न केवल आर्थिक केंद्र है, बल्कि हजारों परिवारों की आजीविका का आधार। भावों की यह गिरावट एक चेतावनी है कि कृषि बाजार कितना अस्थिर हो सकता है। किसानों को मजबूत बनने के लिए सहकारी समितियां, बेहतर भंडारण और बाजार जानकारी जरूरी है। उम्मीद है कि जल्द ही बाजार सुधरे और किसानों के चेहरे पर मुस्कान लौटे। यदि आप खाचरोद या आसपास के किसान हैं, तो अपनी राय साझा करें – क्या आपको लगता है कि भाव जल्द सुधरेंगे?