आज का दिन राकोड़ा मटर मंडी के लिए एक सामान्य दिन नहीं था। जैसा कि सभी स्थानीय किसानों, व्यापारियों और आम लोगों को पता है, मंडी आज पूरी तरह से बंद रही। आमतौर पर यह मंडी उत्तर भारत के कई इलाकों से आने वाले मटर (मटर) के व्यापार का प्रमुख केंद्र होती है, जहां रोजाना हजारों क्विंटल मटर की खरीद-बिक्री होती है। लेकिन आज, शायद किसी प्रशासनिक कारण, मौसम की मार या अन्य वजहों से मंडी के गेट बंद थे। ऐसे में किसान अपनी फसल लेकर कहां जाते? यही सवाल कई लोगों के मन में था।
लेकिन इस बंदी के बीच एक उम्मीद की किरण बनी जेके वेजिटेबल एंड कंपनी, जिसके मालिक अफजल भाई हैं। उनकी कंपनी का कांटा आज भी चालू रहा, और उन्होंने मटर की खरीदारी जारी रखी। यह न सिर्फ किसानों के लिए राहत की बात थी, बल्कि बाजार की गतिशीलता को बनाए रखने का एक उदाहरण भी।
आज की स्थिति में अफजल भाई की कंपनी JK VEGETABLE COMPANY (PTG)ने इस समस्या का समाधान किया।
मटर मंडी भाव
उनके कांटे पर पेंसिल मटर 20 रुपये प्रति किलो से लेकर 25 रुपये प्रति किलो के हिसाब से खरीदा गया।
वहीं, देसी मटर 17 रुपये से शुरू होकर 20 रुपये प्रति किलो तक के रेट पर लिया गया।
यह दरें बाजार की औसत दरों से थोड़ी ऊपर-नीचे हैं, लेकिन बंदी के दिन में यह किसानों के लिए एक अच्छा विकल्प साबित हुआ।
अफजल भाई, जो जेके वेजिटेबल एंड कंपनी के मालिक हैं, लंबे समय से इस व्यापार में हैं। वे स्थानीय स्तर पर काफी लोकप्रिय हैं क्योंकि वे किसानों के साथ निष्पक्ष व्यवहार करते हैं। उनकी कंपनी न सिर्फ मटर बल्कि अन्य सब्जियों का भी व्यापार करती है, लेकिन मटर सीजन में उनका फोकस मुख्य रूप से इसी पर रहता है। आज जब मंडी बंद थी, तो अफजल भाई ने अपना कांटा चालू रखकर एक तरह से सामाजिक जिम्मेदारी निभाई। कई किसान, जो सुबह-सुबह अपनी फसल लेकर मंडी पहुंचे थे, निराश होकर लौट रहे थे। लेकिन अफजल भाई के कांटे की खबर फैलते ही वे वहां जमा हो गए। एक किसान ने बताया, “मंडी बंद होने से हमारी फसल बर्बाद होने वाली थी, लेकिन अफजल भाई ने हमें उचित दाम दिए। 20-25 रुपये प्रति किलो पेंसिल मटर के लिए काफी अच्छा है।” इसी तरह, देसी मटर के लिए 17-20 रुपये की दर ने छोटे किसानों को राहत दी, जो आमतौर पर बाजार में कम दाम मिलने से परेशान रहते हैं।
घटना हमें बाजार की अनिश्चितताओं के बारे में सोचने पर मजबूर करती है। भारत जैसे कृषि प्रधान देश में मंडियों की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है। लेकिन कभी-कभी प्रशासनिक फैसलों, छुट्टियों या अन्य कारणों से ये बंद हो जाती हैं, जिसका सीधा असर किसानों पर पड़ता है। राकोड़ा मंडी जैसी जगहों पर मटर की सप्लाई चेन दिल्ली, मुंबई जैसे बड़े शहरों तक जाती है। अगर मंडी बंद रहती है, तो न सिर्फ किसान प्रभावित होते हैं, बल्कि उपभोक्ताओं को भी ऊंचे दाम चुकाने पड़ सकते हैं। ऐसे में अफजल भाई जैसे व्यापारियों की भूमिका सराहनीय है। वे न सिर्फ व्यापार करते हैं, बल्कि किसानों के साथ एक पार्टनरशिप बनाते हैं। उनकी कंपनी में आधुनिक वजन मशीनें हैं, जो सटीक माप देती हैं, और भुगतान भी तुरंत होता है। आज की खरीदारी में लगभग 50-60 किसानों ने अपनी फसल बेची, जिससे अनुमान लगाया जा सकता है कि कितना बड़ा योगदान यह रहा।
मटर की खेती के बारे में बात करें तो यह एक मौसमी फसल है। पेंसिल मटर, जो विदेशी किस्म से प्रेरित है, अपनी लंबाई और चमकदार हरे रंग के लिए जाना जाता है। इसे मुख्य रूप से सलाद, सब्जी या प्रोसेसिंग के लिए इस्तेमाल किया जाता है। इसकी कीमत आमतौर पर 15-30 रुपये प्रति किलो तक रहती है, जो मौसम और मांग पर निर्भर करती है। वहीं, देसी मटर ज्यादा मजबूत और स्वादिष्ट होता है, लेकिन इसकी उपज थोड़ी कम होती है। किसान इसे जैविक तरीके से उगाते हैं, और इसमें कीटनाशकों का कम इस्तेमाल होता है। आज की दरें – पेंसिल के लिए 20-25 और देसी के लिए 17-20 – काफी संतुलित हैं। अगर मंडी खुली होती, तो शायद ये दरें थोड़ी ऊंची होतीं, लेकिन बंदी में यह किसानों के लिए एक अच्छा सौदा था।
इस घटना से हमें सीख मिलती है कि बाजार में वैकल्पिक व्यवस्थाएं कितनी जरूरी हैं। सरकार को भी ऐसी स्थितियों के लिए बैकअप प्लान बनाना चाहिए, जैसे ऑनलाइन ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म या अस्थायी मंडियां। अफजल भाई की कंपनी ने आज साबित किया कि एक व्यक्ति या कंपनी भी बड़ा बदलाव ला सकती है। उनके कांटे पर आज का माहौल काफी व्यस्त था – ट्रक आते-जाते, किसान अपनी फसल उतारते, और अफजल भाई खुद मौजूद रहकर सब कुछ संभालते। एक स्थानीय व्यापारी ने कहा, “अफजल भाई जैसे लोग बाजार की रीढ़ हैं। अगर वे न होते, तो आज कई परिवारों की रोजी-रोटी पर असर पड़ता।”