नमस्कार किसान भाइयों और व्यापारियों, आज 17 दिसंबर 2025 को मध्य प्रदेश की प्रमुख कृषि मंडियों में से एक खाचरोद मटर मंडी में कारोबार कुछ सुस्त रहा। सर्दी के इस मौसम में हरी मटर की आवक अच्छी खासी हो रही है, लेकिन मांग थोड़ी कमजोर होने से बाजार 전체 तौर पर नरम रहा। किसान अपनी फसल लेकर मंडी पहुंचे, लेकिन बोली में उतनी तेजी नहीं दिखी जितनी उम्मीद थी। आइए विस्तार से समझते हैं आज के भाव, बाजार की स्थिति और इसके पीछे के कारणों को।
सबसे पहले बात करें बेस्ट क्वालिटी पेंसिल मटर की
आज इसकी दरें 27 से 30 रुपये प्रति किलोग्राम के बीच रही।
इसके बाद मीडियम ग्रेड की मटर, जो सामान्य रूप से अच्छी गुणवत्ता वाली होती है, उसकी कीमत 26 से 27 रुपये प्रति किलोग्राम रही।
फिर हल्का ग्रेड, जो थोड़ी कम गुणवत्ता वाला होता है, उसकी कीमत 22 से 24 रुपये तक रही।
देसी मटर भाव
उसकी कीमत 24 से 25 रुपये तक रही, जो कभी-कभी 26 तक पहुंच गई
मीडियम श्रेणी की कीमत 22 से 24 रुपये रही, जो
और सबसे नीचे हल्का ग्रेड, जो 20 से 22 रुपये तक बिका
बाजार की इस नरमी के पीछे कई कारण हो सकते हैं। सबसे प्रमुख कारण तो मटर की बंपर आवक है। इस मौसम में मध्य प्रदेश सहित उत्तर भारत के कई राज्यों में मटर की फसल अच्छी हुई है। बारिश की सही मात्रा और मौसम की अनुकूलता ने उत्पादन को बढ़ावा दिया, जिससे मंडी में सप्लाई डिमांड से ज्यादा हो गई। जब सप्लाई ज्यादा होती है, तो कीमतें स्वाभाविक रूप से गिरती हैं। इसके अलावा, अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सब्जियों की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। भारत मटर का बड़ा निर्यातक है, लेकिन हाल ही में कुछ देशों में आयात प्रतिबंध या कम मांग के कारण घरेलू बाजार पर दबाव बढ़ा है। साथ ही, महंगाई की मार से आम उपभोक्ता भी कम खरीदारी कर रहा है, जिससे व्यापारियों को स्टॉक रखने में दिक्कत हो रही है।
खाचरोद मंडी की बात करें तो यह मंडी साल भर सक्रिय रहती है, लेकिन सर्दियों में मटर, गेहूं और सोयाबीन जैसी फसलों की वजह से यहां रौनक बढ़ जाती है। यहां पर रोजाना सैकड़ों ट्रक आते हैं, और हजारों किसान अपनी मेहनत की कमाई के इंतजार में रहते हैं। लेकिन आज जैसे दिन किसानों के लिए निराशाजनक होते हैं। एक स्थानीय किसान रामलाल ने बताया, “हमने पूरी मेहनत से फसल उगाई, लेकिन कीमतें इतनी कम हैं कि लागत भी नहीं निकल रही। बीज, खाद और मजदूरी का खर्चा बढ़ता जा रहा है, लेकिन बाजार हमें धोखा दे रहा है।” ऐसे में किसानों की यह चिंता जायज है कि अगर यह सिलसिला जारी रहा तो उनकी आर्थिक स्थिति और बिगड़ सकती है।
व्यापारियों की भी अपनी समस्याएं हैं। मंडी के एक पुराने व्यापारी मोहनलाल जैन कहते हैं, “बाजार नरम होने से हमारा मुनाफा कम हो जाता है। हम बड़े शहरों जैसे इंदौर, भोपाल या दिल्ली भेजते हैं, लेकिन वहां भी डिमांड कम है। कोल्ड स्टोरेज का खर्चा अलग से है।” वास्तव में, मंडी की नरमी पूरे सप्लाई चेन को प्रभावित करती है। ट्रांसपोर्टर, मजदूर और यहां तक कि स्थानीय दुकानदार भी इससे प्रभावित होते हैं।
अगर हम पिछले कुछ दिनों की तुलना करें, तो कल की मंडी में बेस्ट क्वालिटी पेंसिल ग्रेड 28 से 32 तक बिका था, लेकिन आज गिरकर 27-30 पर आ गया। इसी तरह अन्य ग्रेड में भी 1-2 रुपये की गिरावट देखी गई। विशेषज्ञों का मानना है कि यह गिरावट अस्थायी हो सकती है। अगर मौसम खराब होता है या किसी क्षेत्र में फसल को नुकसान पहुंचता है, तो सप्लाई कम हो सकती है और कीमतें फिर से ऊपर जा सकती हैं। साथ ही, सरकार की ओर से न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) या अन्य योजनाओं से किसानों को राहत मिल सकती है। मध्य प्रदेश सरकार ने हाल ही में कृषि क्षेत्र में कई सब्सिडी की घोषणा की है, जो किसानों को बीज और उर्वरक पर छूट प्रदान करती है। लेकिन फिलहाल, मंडी में माहौल उदास है।
कुल मिलाकर, आज खाचरोद मटर मंडी में बाजार की नरमी ने सभी को सोचने पर मजबूर कर दिया है। किसानों से अपील है कि वे फसल की गुणवत्ता पर ध्यान दें और विविधीकरण अपनाएं, जैसे अन्य सब्जियां या फल उगाना। व्यापारियों को स्टोरेज और मार्केटिंग पर फोकस करना चाहिए। अगर यह स्थिति लंबे समय तक रही, तो इसका असर पूरे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। उम्मीद है कि आने वाले दिनों में बाजार में सुधार आएगा और कीमतें स्थिर होंगी। कृषि हमारे देश की आधारशिला है, और ऐसी मंडियां इसका दिल हैं। हमें इन्हें मजबूत बनाने के लिए सामूहिक प्रयास करने होंगे।