राकोदा मटर मंडी के आज के ताज़ा भाव – क्वालिटी के अनुसार फसल की गिरावट देखने को मिली
राकोदा, मध्य प्रदेश के मंदसौर जिले में स्थित एक छोटा सा गांव है, जो अपनी कृषि गतिविधियों के लिए जाना जाता है। यहां की लोकल मंडी, जिसे राकोदा मंडी के नाम से जाना जाता है, आसपास के किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र है। यह मंडी मुख्य रूप से सब्जियों, अनाज और अन्य कृषि उत्पादों की थोक बिक्री के लिए प्रसिद्ध है। हाल के वर्षों में, यहां पेंसिल बीन्स (जिसे फ्रेंच बीन्स की एक पतली वैरायटी के रूप में जाना जाता है) की मांग बढ़ी है, क्योंकि यह सब्जी अपनी पतली, लंबी आकृति और पौष्टिक गुणों के कारण शहरों में लोकप्रिय हो रही है।
पेंसिल बीन्स विटामिन ए, सी और फाइबर से भरपूर होती है, और इसे सलाद, सब्जी या स्टिर-फ्राई में इस्तेमाल किया जाता है।
आज, 12 दिसंबर 2025 को, राकोदा मंडी में पेंसिल बीन्स के विभिन्न ग्रेड के भाव कुछ इस प्रकार हैं:
बेस्ट क्वालिटी 44 रुपये प्रति किलो,
मीडियम 36 से 38 रुपये
, हल्का 34 से 35 रुपये,
देसी 34 से 37 रुपये
, मीडियम 30 से 32 रुपये
, और हल्का 29 से 31 रुपये प्रति किलो।
ये दरें बाजार की मांग, मौसम और आपूर्ति पर निर्भर करती हैं, और इन्हें समझना किसानों के लिए जरूरी है।पेंसिल बीन्स की खेती मुख्य रूप से मध्य प्रदेश, कर्नाटक और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में होती है। राकोदा जैसे ग्रामीण क्षेत्रों में किसान इसे छोटे पैमाने पर उगाते हैं, क्योंकि यह फसल कम पानी और कम जगह में अच्छी पैदावार देती है।
लेकिन बाजार में उतार-चढ़ाव आम बात है। आज की दरों को देखें तो बेस्ट क्वालिटी का भाव 44 रुपये तक पहुंचा है, जो पिछले हफ्ते से थोड़ा ऊपर है। इसका कारण शहरी बाजारों में बढ़ती मांग है, खासकर होटल और रेस्टोरेंट इंडस्ट्री में जहां ताजी और प्रीमियम क्वालिटी की सब्जियों की जरूरत होती है। वहीं, मीडियम ग्रेड 36 से 38 रुपये के बीच है, जो औसत किसानों के लिए ठीक-ठाक कमाई देता है। हल्का ग्रेड, जो थोड़ी कम गुणवत्ता वाला होता है, 34 से 35 रुपये में बिक रहा है।
देसी वैरायटी, जो लोकल बीजों से उगाई जाती है और ज्यादा टिकाऊ होती है, 34 से 37 रुपये की रेंज में है। नीचे के ग्रेड जैसे मीडियम 30-32 और हल्का 29-31 रुपये वाले, आमतौर पर लोकल बाजार या छोटे व्यापारियों को बेचे जाते हैं।ये भाव क्यों ऐसे हैं? सबसे पहले, मौसम का असर। दिसंबर में सर्दी के कारण फसल की पैदावार थोड़ी कम हो जाती है, जिससे आपूर्ति घटती है और कीमतें बढ़ती हैं।
मंदसौर जिले में राकोदा के आसपास के किसान बताते हैं कि इस साल बारिश की कमी से फसल प्रभावित हुई है, लेकिन पेंसिल बीन्स जैसी फसलें अपेक्षाकृत मजबूत हैं। दूसरा, ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट। राकोदा मंडी से भोपाल या इंदौर जैसे बड़े शहरों तक माल पहुंचाने में ईंधन और लेबर का खर्च बढ़ गया है, जो सीधे भाव पर असर डालता है। तीसरा, बाजार की प्रतिस्पर्धा। कर्नाटक से आने वाली पेंसिल बीन्स सस्ती होती हैं, लेकिन राकोदा की लोकल प्रोडक्शन ताजी और कम कीटनाशक वाली होती है, जिससे प्रीमियम ग्रेड की मांग बनी रहती है।
एक लोकल किसान, रामलाल जी, जिन्होंने 5 एकड़ में पेंसिल बीन्स उगाई है, कहते हैं, “इस साल बेस्ट क्वालिटी का 44 रुपये मिलना अच्छा है, लेकिन हल्के ग्रेड के लिए 29-31 रुपये कम लगते हैं। सरकार को मिनिमम सपोर्ट प्राइस बढ़ाना चाहिए।”राकोदा मंडी का इतिहास भी दिलचस्प है। यह मंडी 1980 के दशक से सक्रिय है, जब मंदसौर जिला कृषि हब बनने लगा था। आज यहां रोजाना सैकड़ों किसान आते हैं, और व्यापारी दिल्ली, मुंबई तक माल भेजते हैं। पेंसिल बीन्स जैसे उत्पादों ने महिलाओं को भी रोजगार दिया है, क्योंकि इसकी कटाई और पैकिंग में ज्यादा हाथ लगते हैं।
लेकिन चुनौतियां भी हैं। जलवायु परिवर्तन से फसलें प्रभावित हो रही हैं, और मार्केट में मिडलमैन किसानों का शोषण करते हैं। अगर भाव 29-31 जैसे निचले स्तर पर रहते हैं, तो छोटे किसान घाटे में जा सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ऑर्गेनिक फार्मिंग अपनाकर किसान ऊंचे भाव पा सकते हैं, क्योंकि शहरों में ऑर्गेनिक सब्जियों की डिमांड बढ़ रही है।कुल मिलाकर, आज राकोदा मंडी में पेंसिल बीन्स के भाव बाजार की सकारात्मक तस्वीर पेश करते हैं, खासकर बेस्ट और देसी ग्रेड के लिए। लेकिन हल्के ग्रेड के लिए सुधार की जरूरत है। किसानों को सरकारी योजनाओं जैसे पीएम किसान सम्मान निधि का फायदा उठाना चाहिए, और मंडी को डिजिटल बनाना चाहिए ताकि सीधे खरीदारों से जुड़ सकें। अगर ये भाव स्थिर रहें, तो आने वाले महीनों में पैदावार बढ़ सकती है। राकोदा जैसे छोटे बाजार भारत की कृषि अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं, और इन्हें मजबूत बनाने से पूरे देश को फायदा होगा