एपी-3 मटर की किस्म: एक उन्नत और लोकप्रिय विकल्प

एपी-3 मटर की किस्म: एक उन्नत और लोकप्रिय विकल्पमटर (Pisum sativum)

भारत में सर्दियों की प्रमुख सब्जी फसलों में से एक है। हरी मटर न केवल स्वादिष्ट होती है, बल्कि पौष्टिक तत्वों से भरपूर भी होती है। इनमें प्रोटीन, फाइबर, विटामिन और मिनरल्स प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। भारत में मटर की कई उन्नत किस्में विकसित की गई हैं, जिनमें एपी-3 (Azad Pea-3) किस्म किसानों के बीच काफी लोकप्रिय है। यह किस्म अपनी शीघ्र पकने वाली प्रकृति, अच्छी उपज और बाजार में मांग के कारण विशेष रूप से पसंद की जाती है।

एपी-3 किस्म की विशेषताएं

पकने का समय: यह एक अगेती किस्म है। बुवाई के 65-75 दिनों में पहली तुड़ाई शुरू हो जाती है। अक्टूबर के दूसरे सप्ताह में बुवाई करने पर 70 दिनों में फलियां तैयार हो जाती हैं।

पौधे की प्रकृति: पौधे मध्यम ऊंचाई के होते हैं, फलियां आकर्षक हरी, अच्छी तरह भरी हुई और मीठी दानों वाली होती हैं।

उपज: प्रति हेक्टेयर 80-100 क्विंटल हरी फलियां तक प्राप्त की जा सकती हैं। अच्छी देखभाल से यह उपज और अधिक हो सकती है।

रोग प्रतिरोधकता: यह किस्म पाउडरी मिल्ड्यू जैसी कुछ बीमारियों के प्रति मध्यम प्रतिरोधी है, लेकिन शीघ्र पकने के कारण कई रोगों से बच जाती है।

तुलना अन्य किस्मों से: आर्केल (Arkel) किस्म के समान लेकिन उपज में 10-15% अधिक। यह जीएस-10 जैसी अन्य किस्मों से भी बेहतर मानी जाती है क्योंकि दाने मीठे और मुलायम होते हैं।

एपी-3 उत्तर प्रदेश, पंजाब, बिहार, मध्य प्रदेश और राजस्थान जैसे राज्यों में व्यापक रूप से उगाई जाती है। यह किस्म बाजार में अच्छा दाम दिलाती है क्योंकि इसकी फलियां ताजी और स्वादिष्ट होती हैं।

एपी-3 मटर की खेती कैसे करेंजलवायु और मिट्टी:ठंडी जलवायु वाली फसल है। तापमान 15-22°C उपयुक्त।दोमट या बलुई दोमट मिट्टी सबसे अच्छी। pH 6-7.5। पानी का अच्छा निकास जरूरी।

बुवाई का समय:मैदानी क्षेत्रों में अक्टूबर-नवंबर।पहाड़ी क्षेत्रों में मार्च-अप्रैल।बीज दर और उपचार:प्रति हेक्टेयर 75-100 किग्रा बीज।बुवाई से पहले थीरम या मैंकोजेब 2-3 ग्राम/किग्रा बीज से उपचारित करें।

खाद और उर्वरक:15-20 टन गोबर की खाद।नाइट्रोजन 20 किग्रा, फॉस्फोरस 60 किग्रा, पोटाश 40 किग्रा प्रति हेक्टेयर।राइजोबियम कल्चर से बीज उपचारित करने से नाइट्रोजन की जरूरत कम हो जाती है।

सिंचाई और देखभाल:बुवाई के बाद हल्की सिंचाई।फूल आने और फली बनने के समय 2-3 सिंचाई।खरपतवार नियंत्रण के लिए 2-3 निराई-गुड़ाई।कीट: एफिड्स और पॉड बोरर के लिए इमिडाक्लोप्रिड या मोनोक्रोटोफॉस का छिड़काव।

तुड़ाई और भंडारण:फलियां हरी और कोमल होने पर तुड़ाई करें।4-5 तुड़ाई में पूरी फसल निकल जाती है।ताजी फलियां बाजार में बेचें या ठंडे स्थान पर रखें।

लाभ और मुनाफा

एपी-3 से कम समय में अच्छी कमाई संभव है। प्रति एकड़ लागत लगभग 20-25 हजार रुपये, जबकि उपज 30-40 क्विंटल तक हो सकती है। बाजार भाव 2000-4000 रुपये/क्विंटल होने पर 50-80 हजार रुपये का शुद्ध मुनाफा आसानी से हो जाता है।

किसान भाइयों, अगर आप अगेती और लाभकारी फसल चाहते हैं तो एपी-3 मटर की किस्म जरूर आजमाएं। सही प्रबंधन से यह आपको निराश नहीं करेगी। अधिक जानकारी के लिए स्थानीय कृषि विभाग या विश्वविद्यालय से संपर्क करें।

खेती खुशहाली लाए!

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