खाचरोद मंडी में आज मटर के भाव 10 दिसंबर 2025

मंडी में आज मटर के भाव देखकर मन थोड़ा खुश भी हुआ और थोड़ा चिंतित भी। सुबह-सुबह जब मंडी पहुंचा तो पहले तो लगा कि इस बार किसानों को अच्छा दाम मिलेगा, क्योंकि टॉप क्वालिटी की पेंसिल मटर (50-54 mm) 50 से 54 रुपए किलो तक बिकी। जो दाना एकदम चमकदार, लंबा-गोल और बराबर साइज़ का था, उसे व्यापारी हाथों-हाथ ले उड़े। पिछले हफ्ते तक यही क्वालिटी 44-48 में मुश्किल से जा रही थी, आज अचानक 6-8 रुपए का उछाल देखकर किसानों के चेहरे पर मुस्कान लौट आई।

लेकिन जैसे-जैसे लॉट आगे बढ़े, तस्वीर बदलती गई। मीडियम पेंसिल (46-50 mm) का भाव 46 से 50 रुपए ही रहा, यानी टॉप से थोड़ा नीचे। यह क्वालिटी सबसे ज्यादा आती है और ज्यादातर किसानों की यही माल होती है, इसलिए इसका भाव बाजार का असली मूड बताता है। आज यह औसतन 48 रुपए के आसपास टिका रहा, जो ठीक-ठाक है, न बहुत अच्छा, न बहुत बुरा।

फिर आया हल्का माल (40-46 mm)। इसमें थोड़ी नमी थी, कुछ दाने टूटे-फूटे थे, रंग भी हल्का पड़ गया था। इसका भाव 40 से 46 रुपए तक रहा। जो किसान जल्दबाजी में कटाई कर लेते हैं या जिनके खेत में पानी ज्यादा हो गया, उनका माल इसी कैटेगरी में चला जाता है। आज कई किसान निराश भी दिखे, क्योंकि लागत निकालने के लिए कम से कम 42-43 तो चाहिए ही।

अब बारी आई देसी और छोटी-मध्यम क्वालिटी की। देसी मटर (ज्यादातर 40-44 mm) का भाव 40 से 44 रुपए तक रहा। यह वही मटर है जो गांवों में लोग खुद खाते हैं, चटनी बनाते हैं, पराठे में डालते हैं। व्यापारियों ने इसे भी अच्छे से उठाया, क्योंकि होटल और ढाबों की डिमांड अभी भी बनी हुई है।

सबसे नीचे का माल, यानी मीडियम (38-42 mm) और हल्का (35-38 mm) बहुत कम आया, लेकिन जो आया उसका भाव देखकर दिल दुखी हो गया। 38-42 वाला माल 38 से 42 रुपए और उससे नीचे का 35 से 38 रुपए तक बिका। कुछ तो 34-35 में भी चला गया।

ये वही किसान थे जिन्होंने या तो देर से बुवाई की या मौसम ने साथ नहीं दिया। उनकी सारी मेहनत मानो मिट्टी में मिल गई।कुल मिलाकर आज मंडी में अच्छी क्वालिटी को अच्छा दाम मिला, लेकिन औसत और उससे नीचे की क्वालिटी वालों को लागत भी मुश्किल से निकली। व्यापारी बोल रहे थे कि दिल्ली, मुंबई की मंडियों में अभी भी डिमांड है, पर वहां भी सिर्फ टॉप क्वालिटी मांग रहे हैं।

बाकी माल लोकल स्तर पर ही खप रहा है।मैंने एक बुजुर्ग किसान से बात की, वे बोले, “बेटा, मटर का खेल तो क्वालिटी का है। जिस साल दाना चमकदार और साइज बराबर आया, उस साल किसान राजा बन जाता है। जिस साल मौसम ने धोखा दे दिया, उसी साल मेहनत पर पानी फिर जाता है।” उनकी बात दिल को छू गई।अभी दिसंबर चल रहा है, जनवरी तक मटर का सीजन चलेगा।

उम्मीद है कि आने वाले दिनों में औसत माल को भी थोड़ा बेहतर दाम मिले, ताकि हर किसान के चेहरे पर मुस्कान लौट आए। आखिर मटर उगाना कोई आसान काम नहीं – ठंड में सुबह चार बजे उठकर खेत जाना, कटाई करना, छंटाई करना, फिर मंडी लाना… ये सब मेहनत का फल है। बस भगवान करे कि इस मेहनत की कीमत सही मिले। खाचरोद मंडी, 10 दिसंबर 2025

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